एक ग़ज़ल, कुछ ख़त, गेरो की मोहबत, गम की वजह

एक ग़ज़ल, कुछ ख़त, गेरो की मोहबत,
गम की वजह, कल की किताब


?एक ग़ज़ल? तेरे लिए ज़रूर लिखूंगा;??बे-हिसाब उस में ??तेरा कसूर लिखूंगा;???टूट गए ❤बचपन के ??तेरे सारे खिलौने;✋??अब दिलों ???से खेलना तेरा ?✋✌??दस्तूर लिखूंगा।???✋?


???न जाने ???कैसे ?आग लग??? गई बहते?? हुये पानी में..???हमने तो ?✌✋बस कुछ✋?? ख़त बहाये थे, ??✌“उसके नाम के“…??✌


???मजा चख लेने ??दो उसे गेरो ??की मोहबत? का भी, ???इतनी ?चाहत के ?✌?बाद ?जो मेरा न ?✌?हुआ ?वो ओरो का ?✋✌क्या होगा।???


???जानते हो ??महोब्बत किसे ?कहते हैं ??✋?? किसी को ?सोचना,??✋? फिर मुस्कुराना?? और फिर आसू ???बहाते हुए ???सो जाना.????


???वो बड़े ताज्जुब से??✋ पूछ बैठा मेरे ???गम की वजह..????फिर हल्का सा ???मुस्कराया,? और कहा,?✌? मोहब्बत की ??थी ना… ??✋???


???✋क़ाश कोई? ऐसा???? हो, जो? गले लगा??✌ कर कहे…???!! तेरे दर्द से मुझे✋?? भी तकलीफ ✋?होती है???


???आँसू आ जाते हैं??✌ आँखों में पर ??लबों पर??? हंसी लानी पड़ती है?✌? ये मोहब्बत ??भी क्या??? चीज़ है यारो जिस से?❤ करते हैं ???उसी से छुपानी??? पड़ती है।????


?✌?याद आयेगी ??हमारी तो बीते ???कल की किताब ✋???पलट लेना यूँ ही ???किसी पन्ने पर मुस्कुराते ????हुए हम ?मिल जायेंगे।??❤?

नज़र आ जाओ कही तुम

नज़र आ जाओ कही तुम


मेरी आँखों में जैसे बस रहे, एक सपने से हो तुम!
देख के तुम को लगता है, कितने अपने से हो तुम !!
हमे होश नहीं रहता, जो नज़र आ जाओ कही तुम !
दुनिया से चुरा ले हम तुमको, हो जाये कही गुम !!

हर अदा तुम्हारी हम पर जादू सा कर रही है
पलकों की छांव में कोई जैसे शाम ढल रही है
मुस्कान पर तुम्हारी जैसे लहरें फिसल रही है
देख तुम्हारे गालो की लाली, हसरत मचल रही है

काले बालो में घेरे हुवे हो न जाने कितनी रात तुम !
देख के तुम को लगता है, कितने अपने से हो तुम!!
हमे होश नहीं रहता, जो नज़र आ जाओ कही तुम,!
दुनिया से चुरा ले हम तुमको, हो जाये कही गुम !!

तेरी हंसी के वास्ते मै  हर चीज़ वार दूं
सारे जहाँ की खुशियों से जीवन सवार दूं
जो कभी न भूल पाए तुम्हे उतना प्यार दूं
तुझसे मोहब्बत कर तेरा यौवन निखर दूं

मेरा जीवन तुमसे रौशन मेरी हर एक बात में तुम !
देख के तुम को लगता है, कितने अपने से हो तुम!!
हमे होश नहीं रहता, जो नज़र आ जाओ कही तुम!
दुनिया से चुरा ले हम तुमको, हो जाये कही गुम!!

तेरा दीदार नहीं मिलता

तेरा दीदार नहीं मिलता


एक अरसा हुआ तेरी आगोश में खुद को खोये हुवे,
मगर न जाने कई सालो से हमें तेरा दीदार नहीं मिलता
रोज़ होती है कहने को तुमसे मेरी मुलाकातें,
मगर मेरी नज़र को तेरी नज़र से अब वो ऐतबार नहीं मिलता
मिलने को मिलते है ख्वाबो में तुझसे जोशो खरोश से,
मगर फिर भी मेरी बेचैन धड़कनो को ज़रा भी करार नहीं मिलता
ढूंढ़ता रहता हूँ हर लम्हा,
पर वो प्यार नहीं मिलता,
तेरी तस्वीर में हमें अब वो
खोया संसार नहीं मिलता

इशारा, उलझनें, हक़ीक़त, जहर, आईना, ज़िम्मेदारी

इशारा तो मदद का ही कर रहा था, डूबने वाला..
यारां-ए- साहिल ने सलाम-ए-अलविदा समझा..


उलझनें मीठी भी हो सकती है..
जलेबी इस बात का जिन्दा उदाहरण है…..


बस हक़ीक़त ज़ुबान पर रखदे।
ख़ुद को फिर इम्तिहान पर रखदे।।
एक दिन तू फ़लक़ को चूमेंगा।
सोच ऊंची उड़ान रखदे।।


तेरे लहजे में लाख मिठास सही मगर,
मुझे जहर लगता है तेरा औरों से बात करना…..


आज टूट गया तो
बच-बच कर निकलते हो…
कल आईना था तो
रुक-रुक कर देखते थे…


शब्दों में ज़िम्मेदारी झलकनी चाहिए
आप को और भी बहुत लोग पढ़ते है..

एक चूहा और चूहेदानी

???एक चूहा? एक व्यापारी के घर में बिल बना कर रहता था. एक दिन चूहे? ने देखा कि उस व्यापारी ने और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं. चूहे? ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है.
?उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक चूहेदानी थी. ख़तरा भाँपने? पर उस ने पिछवाड़े में जा कर कबूतर? को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है.
कबूतर? ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है?
निराश चूहा ये बात मुर्गे? को बताने गया.
मुर्गे? ने खिल्ली?? उड़ाते हुए कहा… जा भाई..ये मेरी समस्या नहीं है.
हताश चूहे? ने बाड़े में जा कर बकरे? को ये बात बताई… और बकरा? हँसते हँसते? लोटपोट होने लगा
.
उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई जिस में एक ज़हरीला साँप? फँस गया था.
अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा? समझ कर उस व्यापारी की पत्नी ने उसे निकाला और साँप? ने उसे डंस लिया.
तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने वैद्य को बुलवाया. ??वैद्य ने उसे कबूतर? का सूप पिलाने की सलाह दी.
कबूतर अब पतीले में उबल रहा था ।
खबर सुनकर उस व्यापारी के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन मुर्गे? को काटा गया.?
कुछ दिनों बाद उस व्यापारी की पत्नी सही हो गयी… तो खुशी में उस व्यक्ति ने कुछ अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत? रखी तो बकरे? को काटा गया..?….???
चूहा? दूर जा चुका था…बहुत दूर ………..???

अगली बार कोई आप को अपनी समस्या बातये और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है तो रुकिए और दुबारा सोचिये….

समाज का एक अंग, एक तबका, एक नागरिक खतरे में है तो पूरा देश खतरे में है…

अपने-अपने दायरे से बाहर निकलिये.
स्वयंम तक सीमित मत रहिये. .
समाजिक बनिये…
और राष्ट्र धर्म के लिए एक बनें..

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शुक्ला जी का बेटा

शुक्ला जी का बेटा, ऐसी तस्वीर बनाता कि लगता मानो तस्वीर जिन्दा है.!!
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मास्टर जी ने, शुक्ला जी को फोन किया – ..आपका बेटा बड़ा शैतान है ..!!
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आज उसने क्लासरूम की जमीन पे 2000 रूपये के नोट की हूबहू फोटो बना दी..
उसे उठाने के चक्कर में मेरे नाख़ून टूट गए..इसे समझाते क्यों नहीं..?
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शुक्ला जी – ..मास्टरजी ..मैं खुद ICU से बोल रहा हूँ..पगले ने कल बिजली के सॉकेट पे केटरीना बना दी थी..!!
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होंठ जल गए करेंट से.!! ???????.

इश्क की तालीम

इश्क की तालीम

इस इश्क की तालीम ने भी हमें, क्या खूब सिला दिया है
जिसकी याद में जी भी न पाए, उसी ने हमको दिल से भुला दिया है |
कुछ इस कदर साथ रखा है यादों ने उनकी के अकेले होने नहीं देते
हम याद करते है उन्हें इतना की हिचकी से सोने नहीं देते |
अब तो कमी हो गयी है आंसू की गेम मोहब्बत में रट रट
कोई जगा दे जाके उनको भी सुबह हो गयी है उनके सोते सोते |
हर लम्हा उनसे मिलान के हमें इंतज़ार रहा करता है
हमें सत्ता कर के न जाने क्या उन्हें शबे बहार मिलता है |
क्या मेरी पलकों के बरसना ज़रूरी है ऐतबार की खातिर
क्या काफी नहीं पैगाम पहुंचे उस तक मेरी शायरी के ज़रिये |
क्या उम्मीद करे जीवन से नाराज़ है दिल से धड़कन
क्या बताओं तुझको कैसी है मेरे दिल की तड़पन |
ये मेरे जज़्बात की रुस्वाई है या उनका भोलापन की मुझे वफाओं का सिला नहीं है
क्या वजह हुई है जो उनकी खामोश ज़िन्दगी से कोई जवाब अभी तक मिला नहीं है

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तारे रोशन

| तारे रोशन |


एक-एक करके हुए जाते है तारे रोशन |
मेरी मंजिल की तरफ तेरे कदम आते है |
दिल में अब यूं तेरे भूले हुए गम आते है |
जैसे बिछुड़े हुए काबे में सनम आते है |
रक्से-मय तेज करो, |
साज की लय तेज करो |
सूए-मैख़ाना सफीराने-सफर आते है |

मेरा प्यार अभी बाक़ी है

मेरा प्यार अभी बाक़ी है


मेरी ज़िन्दगी में उसका इंतज़ार अभी बाक़ी है ||
उसने मुँह मोड़ा मेरा प्यार अभी बाक़ी है ||
मेरी उलझन की वजह मेरी वफ़ा है ||
शिद्दत से की मोहब्बत ये उसकी सजा है ||
पहली मोहब्बत में ये पहली खता की है ||
उस ज़ालिम से उम्मीद ए वफ़ा की है ||
वह खुश रहे ये इल्तेजा की है ||
उसके खुश रहने की रब से दुआ की है ||
शाम हो गयी दिन ढलते ढलते ||
थक गया हूँ अब अंधेरों में चलते चलते ||
लेकिन फिर भी मेरा प्यार अभी बाक़ी है ||