Sad Shayari मैंने जीना सीख लिया था

SAD SHAYARI मैंने जीना सीख लिया था


मैंने जीना सीख लिया था, ग़म को पीना सीख लिया था
आंसू को मुस्कान बना के, मैंने लबों को सीना सीख लिया था
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वो लम्हों की सौगातें, मुझको न सोने देती थी रातो को
कैसे भूलूं मै उस पल को, जब मैंने छुआ था तेरे हाथों को
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तेरे आग़ोश में आते ही जैसे, मेरा सार संसार बदल गया था
वक्त ने रुख कुछ यूँ बदला, मै उन बातो से निकल गया था ,
आंसू को मुस्कान बना के,  मैंने लबों को सीना सीख लिया था

Sad Shayari मैंने जीना सीख लिया था
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तेरी हर एक मुस्कान में, जैसे मोती बरसते लगते थे
तेरे रूप का दर्शन पाने, दुनिया जहां के लोग तरसते थे
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एक अजब सा अपनापन था तुझमे,  मै रंग में तेरे ढल गया था
किरनो से फिर रंग जो निखारा, लगा तू जैसे बदल गया था
आंसू को मुस्कान बना के, मैंने लबों को सीना सीख लिया था
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