एक नज़र, शायरी का हुनर

एक नज़र, शायरी का हुनर


हर नज़र को एक नज़र की की तलाश है,
हर दिल में छुपा एक एहसास है
आप से प्यार युही नही किया हमने
क्या करे हमारी पसंद ही कुछ ख़ास है
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ना जाने ये कौन सा तरीका हैं… उनका प्यार करने का…!!!
कि उनका दिल ही नहीं करता मुझसे बात करने का…!!!
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इंतज़ार में यह नज़रें झुकी हैं
तेरा दीदार करने की चाह जगी है
न जानूँ तेरा नाम, न तेरा पता
फिर भी न जाने क्यों इस पागल दिल में
एक अज़ब सी बेचैनी जगी है
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शायरी का हुनर हम भी रखते हें
पर अपने शब्दों से कसी को बदनाम करना हमे आता नही
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उसका शुक्रिया कुछ इस तरह से अदा करूँ
वो करे बेवफाई और मैं सदा वफ़ा करूँ
मेरी मोहोब्बत ने बस इतना सिखाया मुझे
खुद मिट जाऊं पर उसके लिए दुआ करूँ
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ऐ जिंदगी मुझे कुछ मुस्कराहटे उधार दे दे,
अपने आ रहें हैं मिलने की रस्म निभानी है
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कुछ नशा तेरी बात का है,
कुछ नशा धीमी बरसात का है,
हमे तुम यूँही पागल मत समझो,
ये दिल पर असर पहली मुलाकात का है!!
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