हम नहीं मिले आखिर तो क्या मेरा सरोकार रहा है तुमसे

हम नहीं मिले आखिर तो क्या मेरा सरोकार रहा है तुमसे


हम नहीं मिले आखिर तो क्या मेरा सरोकार रहा है तुमसे
तुम्हे यकीन हो न हो हमारे दिल को प्यार रहा है तुमसे
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तुम पाना जो चाहो तो मैं दूर नहीं,
जो लौट के न आ सकू, इतना मजबूर नहीं
तुमसे ज्यादा हो सके वो रौशन,
कहीं ऐसा भी कोई हूर नहीं
बरसो बीते जीवन में, ऐतबार मेरा तो रहा है तुमसे
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हम नहीं मिले आखिर तो क्या मेरा सरोकार रहा है तुमसे
तुम यकीन हो न हो हमारे दिल को प्यार रहा है तुमसे
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तनहा ही अब मैं निकल पड़ा हूँ
अपनों की खुशियों को लिए खड़ा हूँ
नाता तोड़ लो मुलाकात का हमसे
मांग रहा क़ुरबानी तुमसे
मुझको वापस पाओगे तुम, ज़रा भी सच्चा दिल रहा है तुमसे
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हम नहीं मिले आखिर तो क्या मेरा सरोकार रहा है तुमसे
तुम्हे यकीन हो न हो हमारे दिल को प्यार रहा है तुमसे
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