मोहब्बतों में ज़रा सी कसक ज़रूरी है

SAD SHAYARI | मोहब्बतों में ज़रा सी कसक ज़रूरी है | ROMANTIC SHAYARI


मोहब्बतों में ज़रा सी कसक ज़रूरी है
शिकायतों के गुलों की महक ज़रूरी है
कोई सवाल करूँ मैं तुमसे तो नाराज़ मत होना जान
क्यों की सच्चे प्यार में थोड़ा सा शक़ ज़रूरी है
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अपनी मुहब्बत की हकीकत को मन में परखना ज़रूरी है
न बिखर जाए किसी के सपने ये भी समझना ज़रूरी है
ये सच है की धुप को सह कर के कोई रिश्ता पनपता है
मगर नन्हे पौधे को भी संभाले रखना ज़रूरी है
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दूर रहते है दिलो में रहकर, जाने ये कैसे कमाल करते है
खुद भी मायूस रहते है और हमें भी इतना बेहाल करते है
उन्हें यकीन नहीं होता, मेरी हर बात पे सवाल करते है
किसी के साथ देखें भी तो ये पल भर में बवाल करते है



इशारा, उलझनें, हक़ीक़त, जहर, आईना, ज़िम्मेदारी

इशारा तो मदद का ही कर रहा था, डूबने वाला..
यारां-ए- साहिल ने सलाम-ए-अलविदा समझा..


उलझनें मीठी भी हो सकती है..
जलेबी इस बात का जिन्दा उदाहरण है…..


बस हक़ीक़त ज़ुबान पर रखदे।
ख़ुद को फिर इम्तिहान पर रखदे।।
एक दिन तू फ़लक़ को चूमेंगा।
सोच ऊंची उड़ान रखदे।।


तेरे लहजे में लाख मिठास सही मगर,
मुझे जहर लगता है तेरा औरों से बात करना…..


आज टूट गया तो
बच-बच कर निकलते हो…
कल आईना था तो
रुक-रुक कर देखते थे…


शब्दों में ज़िम्मेदारी झलकनी चाहिए
आप को और भी बहुत लोग पढ़ते है..