इश्क की तालीम

इश्क की तालीम

इस इश्क की तालीम ने भी हमें, क्या खूब सिला दिया है
जिसकी याद में जी भी न पाए, उसी ने हमको दिल से भुला दिया है |
कुछ इस कदर साथ रखा है यादों ने उनकी के अकेले होने नहीं देते
हम याद करते है उन्हें इतना की हिचकी से सोने नहीं देते |
अब तो कमी हो गयी है आंसू की गेम मोहब्बत में रट रट
कोई जगा दे जाके उनको भी सुबह हो गयी है उनके सोते सोते |
हर लम्हा उनसे मिलान के हमें इंतज़ार रहा करता है
हमें सत्ता कर के न जाने क्या उन्हें शबे बहार मिलता है |
क्या मेरी पलकों के बरसना ज़रूरी है ऐतबार की खातिर
क्या काफी नहीं पैगाम पहुंचे उस तक मेरी शायरी के ज़रिये |
क्या उम्मीद करे जीवन से नाराज़ है दिल से धड़कन
क्या बताओं तुझको कैसी है मेरे दिल की तड़पन |
ये मेरे जज़्बात की रुस्वाई है या उनका भोलापन की मुझे वफाओं का सिला नहीं है
क्या वजह हुई है जो उनकी खामोश ज़िन्दगी से कोई जवाब अभी तक मिला नहीं है

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मेरा प्यार अभी बाक़ी है

मेरा प्यार अभी बाक़ी है


मेरी ज़िन्दगी में उसका इंतज़ार अभी बाक़ी है ||
उसने मुँह मोड़ा मेरा प्यार अभी बाक़ी है ||
मेरी उलझन की वजह मेरी वफ़ा है ||
शिद्दत से की मोहब्बत ये उसकी सजा है ||
पहली मोहब्बत में ये पहली खता की है ||
उस ज़ालिम से उम्मीद ए वफ़ा की है ||
वह खुश रहे ये इल्तेजा की है ||
उसके खुश रहने की रब से दुआ की है ||
शाम हो गयी दिन ढलते ढलते ||
थक गया हूँ अब अंधेरों में चलते चलते ||
लेकिन फिर भी मेरा प्यार अभी बाक़ी है ||

मिज़ाज का परिन्दा

खुदा ने लिखा ही नहीं तुझको
मेरी किस्मत में शायद
वरना खोया तो बहुत कुछ था
एक तुझे पाने के लिए



*न जाने किस मिज़ाज का परिन्दा है यह दिल…*
*सीने मैं तो रहता है मगर वश में नहीं…!!*❤?