तेरा दीदार नहीं मिलता

तेरा दीदार नहीं मिलता


एक अरसा हुआ तेरी आगोश में खुद को खोये हुवे,
मगर न जाने कई सालो से हमें तेरा दीदार नहीं मिलता
रोज़ होती है कहने को तुमसे मेरी मुलाकातें,
मगर मेरी नज़र को तेरी नज़र से अब वो ऐतबार नहीं मिलता
मिलने को मिलते है ख्वाबो में तुझसे जोशो खरोश से,
मगर फिर भी मेरी बेचैन धड़कनो को ज़रा भी करार नहीं मिलता
ढूंढ़ता रहता हूँ हर लम्हा,
पर वो प्यार नहीं मिलता,
तेरी तस्वीर में हमें अब वो
खोया संसार नहीं मिलता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *